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बिलासपुर: सोमवार को कोर्ट कमिश्नर ने हाई कोर्ट की डिविजन बेंच को बताया कि राजनांदगांव के 25 गांवों में जल संकट की शिकायतें वास्तविकता से भिन्न हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इन गांवों में पाइप लाइन के माध्यम से पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन कुछ ग्रामीण टुल्लू पंप के जरिये पानी खींच रहे हैं। इस वजह से जिन घरों में टुल्लू पंप नहीं हैं, वहां पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
कोर्ट की नाराजगी और कार्रवाई के निर्देश: हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई और राज्य शासन को टुल्लू पंप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायतों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जल आपूर्ति सुचारू रूप से हो और टुल्लू पंप लगाने वालों पर उचित कार्रवाई की जाए।
मामले की पृष्ठभूमि: राजनांदगांव निवासी देवेंद्र मोहन ने याचिका दायर कर 25 गांवों में पाइप लाइन से पानी नहीं मिलने और चेकडेम के गलत स्थान पर निर्माण के कारण जल संकट की समस्या का उल्लेख किया था। शासन ने जवाब प्रस्तुत कर बताया कि सभी गांवों में हर घर को पानी की आपूर्ति की जा रही है।
जांच और रिपोर्ट: कोर्ट कमिश्नर ने चीफ जस्टिस के निर्देश पर सभी प्रभावित गांवों का दौरा कर वस्तुस्थिति की जानकारी एकत्र की। ग्रामीणों से चर्चा के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया कि सभी गांवों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से पाइप लाइन से जल आपूर्ति की जा रही है, लेकिन ग्रामीण टुल्लू पंप लगाकर सीधे पाइप से पानी खींच रहे हैं, जिससे आगे के घरों में पानी की कमी हो रही है।
कोर्ट के निर्देश: कोर्ट ने ग्राम पंचायतों को टुल्लू पंप लगाकर पानी खींचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं और जनहित याचिका को निराकृत कर दिया है। कोर्ट का यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति की समस्याओं के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि न्यायालय और प्रशासन जल आपूर्ति की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं और ग्रामीणों को उचित और समान जल वितरण सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं।
