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बिलासपुर:
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य शासन के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें जांजगीर–चांपा जिले की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. स्वाति वंदना सिसोदिया का तबादला कर दिया गया था। कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
याचिका का आधार
डॉ. स्वाति वंदना सिसोदिया ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था कि वह एक क्लास वन अधिकारी हैं, और राज्य शासन ने उनके स्थान पर एक जूनियर डॉक्टर, जो क्लास टू अधिकारी हैं, को सीएमएचओ के पद पर पदस्थ कर दिया है। याचिका में उन्होंने तर्क दिया कि यह राज्य शासन की स्थानांतरण नीति के खिलाफ है और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हिमांशु पांडेय ने कोर्ट में पैरवी करते हुए बताया कि डॉ. स्वाति को जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि उनके जूनियर अधिकारी को उनके ऊपर सीएमएचओ के पद पर नियुक्त कर दिया गया। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, जो समानता और रोजगार में अवसरों की सुरक्षा की गारंटी देते हैं।
राज्य शासन की नीति पर सवाल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने राज्य शासन द्वारा बनाई गई स्थानांतरण नीति का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शासन ने अपने ही नियमों और निर्देशों का उल्लंघन करते हुए जूनियर अधिकारी को सीनियर अधिकारी के स्थान पर तैनात कर दिया है। इसके अलावा, स्थानांतरण के दौरान कैडर के नियमों का भी पालन नहीं किया गया।
हाई कोर्ट का फैसला
सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने डॉ. स्वाति के स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी और राज्य शासन के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीनियर अधिकारियों के रहते हुए जूनियर अधिकारियों को उच्च पद पर नियुक्त करना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
